और इस तरह टूट गया छह महीना पुराना 'साथी' गठबंधन !

Reported by lokpal report

24 Jun 2019

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नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने सोमवार को घोषणा की कि उनकी पार्टी भविष्य के सभी चुनाव अपने दम पर लड़ेगी और वह राज्य में समाजवादी पार्टी के साथ सभी संबंध तोड़ रही है। मायावती द्वारा हाल के लोकसभा चुनावों में भारी हार के लिए अखिलेश के सपा को दोषी ठहराए जाने की रिपोर्ट आने के एक दिन बाद यह बात सामने आई है।

खबरों के अनुसार, बसपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान मायावती ने अखिलेश यादव को लोकसभा चुनावों में अपने गठबंधन की अपमानजनक हार के लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन एक 'बड़ी गलती' थी। अब, बसपा प्रमुख ने इन खबरों का खंडन किया है कि "ये सभी आरोप झूठे हैं और बैठक के दौरान मीडिया मौजूद नहीं था"। उन्होंने आगे कहा कि पार्टी ने एक प्रेस नोट भी जारी किया था जिसमें यह स्पष्ट किया गया था।

उन्होंने कहा कि "बीएसपी की अखिल भारतीय बैठक कल 2.5 घंटे चली। इसके बाद देर रात तक एक के बाद एक बैठकें हुईं, जहाँ मीडिया मौजूद नहीं था। इसीलिए बसपा प्रमुख के बारे में जो अफवाहें फैली हुई हैं, वे सही नहीं हैं और हमने एक प्रेस नोट भी साझा किया है।

उन्होंने आगे कहा, "वैसे भी जगजाहिर है कि सपा के साथ सभी पुराने गिले-शिकवों को भुलाने के साथ-साथ सन् 2012-17 में सपा सरकार के बीएसपी व दलित विरोधी फैसलों, प्रमोशन में आरक्षण विरूद्ध कार्यों एवं बिगड़ी कानून व्यवस्था आदि को दरकिनार करके देश व जनहित में सपा के साथ गठबंधन धर्म को पूरी तरह से निभाया।”

उन्होंने आगे कहा कि "परन्तु लोकसभा आमचुनाव के बाद सपा का व्यवहार बीएसपी को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या ऐसा करके बीजेपी को आगे हरा पाना संभव होगा? जो संभव नहीं है। अतः पार्टी व मूवमेन्ट के हित में अब बीएसपी आगे होने वाले सभी छोटे-बड़े चुनाव अकेले अपने बूते पर ही लड़ेगी।

बसपा ने उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनावों के लिए अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी (सपा) और चौधरी अजीत सिंह की अगुवाई वाली राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के साथ चुनावी गठबंधन किया था। हालाँकि, गठबंधन राजनीतिक रूप से कोई बढ़िया प्रभाव बनाने में विफल रहा। बसपा दस सीटें जीतने में कामयाब रही, जबकि सपा को पांच सीटें मिलीं और आरएलडी को एक सीट।

मायावती पर निशाना साधते हुए, सपा लोकसभा सांसद एसटी हसन ने कहा, "मायावती गठबंधन तोड़ने के बहाने ढूंढ रही हैं, अगर उन्होंने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है, तो सपा भी अकेले चुनाव लड़ेगी।" "पहले भी हम अकेले चुनाव लड़ते थे।"

हसन का कहना है कि “इसे अपने लिए देखें कि गठबंधन से किसको फायदा हुआ और किसे नुकसान। किसके पास कितनी सीटें थीं और इन चुनावों में उन्हें कितनी सीटें मिलीं। उन्हें अखिलेश जी पर इस तरह आरोप नहीं लगाना चाहिए था जैसा कि उन्होने कहा है"।

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