लखनऊ के कार्यालयों में अचानक आई जन्म प्रमाणपत्र बनवाने की बाढ़, क्या सीएए-एनआरसी है इसकी वजह?

Reported by lokpal report

10 Jan 2020

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लखनऊ: देश के कई हिस्सों में नागरिक अभी भी नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) पर तीखे आक्रोश के बीच पिछले साल दिसंबर में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जन्म प्रमाण पत्र की मांग में अचानक उछाल आया है। दिसंबर के महीने में, पांच तहसीलों के साथ-साथ नगर निगम में जन्म प्रमाण पत्र के लिए 6,193 आवेदन आये।

शहर में, 40-60 वर्ष की आयु के लोग अपने और अपने बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र मांग रहे हैं।

अमित कुमार, अतिरिक्त नगर आयुक्त ने कहा, "जन्म प्रमाण पत्र मांगने वालों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। यह एक नियमित प्रक्रिया है और इसे सीएए और एनआरसी के साथ जोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है। हमने इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए आठ क्षेत्रों में सुविधाओं की व्यवस्था की है। जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने वालों भी बुजुर्ग भी हैं। अपना जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त करना लोगों का संवैधानिक अधिकार है"।

उन्होंने कहा कि "हम पर कोई भार नहीं है, ऑनलाइन प्रक्रिया बहुत आसान है। यदि एक आवेदक द्वारा प्रस्तुत सभी दस्तावेज वैध हैं तो 24 घंटे के भीतर हम जन्म प्रमाण पत्र प्रदान कर रहे हैं"।

जिन आवेदकों ने जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया है, उन्होंने मिश्रित प्रतिक्रिया दी। कुछ का कहना है कि जन्म प्रमाण पत्र की मांग में वृद्धि एनआरसी और सीएए के कारण है, जबकि कुछ अन्य का कहना है कि यह एक नियमित प्रक्रिया है।

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