साइबर क्राइम के शीर्ष 20 देशों में भारत तीसरे स्थान पर, ब्रिटेन पहले पायदान पर

Reported by lokpal report

23 Feb 2020

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हैदराबाद: यूएसए के इंटरनेट अपराध शिकायत केंद्र (IC3) फ़ेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टीगेशन द्वारा जारी इंटरनेट अपराध रिपोर्ट 2019 से पता चला है कि भारत दुनिया के उन शीर्ष 20 देशों में तीसरे स्थान पर है जो इंटरनेट अपराधों के शिकार हैं। रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका को छोड़कर, कनाडा, (3,721) और भारत (2,901) के बाद इंटरनेट अपराधों के 93,796 पीड़ितों के साथ ब्रिटेन शीर्ष पर है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में, 3।5 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक के नुकसान के साथ कुल 4,67,361 शिकायतें दर्ज की गईं। हालांकि, ईमेल अभी भी साइबर अपराध करने का सामान्य माध्यम है, लेकिन टेक्स्ट मैसेज और फर्जी वेबसाइट भी इंटरनेट क्राइम का अहम् जरिया है।

IC3 की रिपोर्ट पर FBI की एक विज्ञप्ति बताती है कि वर्ष 2019 में फर्जीवाड़े की किसी नई प्रकृति में वृद्धि नहीं देखी गई, हालाँकि अपराधियों ने साइबर क्राइम के लिए पुराने तरीकों और रणनीतियों को पहले से और बेहतर किया।

नवीनतम राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 2018 में साइबर अपराध के कुल 27,248 मामले दर्ज किए गए। तेलंगाना में, उसी वर्ष 1,205 साइबर अपराध के मामले दर्ज किए गए। केंद्र सरकार द्वारा पिछले साल शुरू किए गए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर अब तक 33,152 शिकायतें मिलीं, जिसके परिणामस्वरूप 790 लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की गई।

'निजी डेटा के साथ छेड़छाड़ एक सामान्य अपराध है'
रिपोर्ट के संबंध में IC3 के प्रमुख डोना ग्रेगोरी ने कहा कि “बस आपके बैंक और ऑनलाइन खातों को दो-कारक प्रमाणीकरण की आवश्यकता होती है, इसे अपनाएं। अनुरोधों को व्यक्तिगत रूप से या फोन के द्वारा वेरीफाई करें, किसी फ़ोन पर आए मैसेज या ईमेल पर आए लिंक को खोलने से पहले डबल चेक जरूर करें।

संयुक्त राज्य अमेरिका में दर्ज किए गए सबसे आम इंटरनेट अपराधों में फ़िशिंग और इसी तरह के लोग थे, जिन्होंने निजी डेटा के साथ छेड़छाड़, रोमांस फ्रॉड और स्पूफिंग किया, भारतीय ऐसे अपराधों के सबसे अधिक शिकार हुआ।

जबकि ईमेल अभी भी इंटरनेट अपराध करने के लिए एक आम विधा है, धोखाधड़ी टेक्स्ट मैसेज द्वारा भी साइबर अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है, साथ ही स्मिशिंग और फिशिंग, नकली वेबसाइटों के जरिये भी लोगों को उल्लू बनाया जाता है और उनकी मेहनत की कमाई ऐंठ ली जाती है।

इसलिए अपने बैंक के बारे में या अपने बारे में किसी अनजाने को जानकारी न दें। किसी के कॉल करने पर शक हो तो कॉल डिसकनेक्ट करके खुद बैंक के नंबर पर कॉल करें।

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