लालू ने लिखा नीतीश कुमार को खुला खत, याद दिलाई लालटेन की अहमियत

Reported by lokpal report

13 May 2019

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पटना : 2019 के लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण से पहले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद ने सोमवार को बिहार के मुख्यमंत्री लिए नीतीश कुमार को एक खुला पत्र लिखा है।

सोमवार सुबह जेल गए नेता के सत्यापित फेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए नोट में, लालू प्रसाद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उनके "लालटेन के दिन खत्म हो गए" टिप्पणी पर उन्हें खूब खरी खोटी सुना दिया।

जनता दल (युनाइटेड) के प्रतीक चिह्न पर निशाना साधते हुए लालू प्रसाद यादव ने कहा, "जब हमने लालटेन प्रकाश के माध्यम से राज्य से बेरोजगारी, अत्याचार, घृणा और अन्याय की बुराइयों को दूर किया, वहीं आपका तीर हिंसा का प्रतीक है।" लालू प्रसाद ने अपने खत में नीतीश से पूछा कि वह किस आधार पर मिसाइलों के युग में तीर चलाने की बात कर रहे हैं।

उन्हें एक अवसरवादी कहते हुए, लालू प्रसाद ने नीतीश कुमार से कहा, "डर में एक शॉर्टकट लेना और समझौता करना आपकी पुरानी आदत रही है। आपने 11 करोड़ लोगों को धोखा दिया है। बाक़ी तुम अब कीचड़ वाले फूल में तीर घोंपो या छुपाओ। "

लालू प्रसाद ने फेसबुक पेज पर लिखा है -

सुनो छोटे भाई नीतीश,

ऐसा प्रतीत हो रहा है कि तुम्हें आजकल उजालों से कुछ ज़्यादा ही नफ़रत सी हो गयी है। दिनभर लालू और उसकी लौ लालटेन-लालटेन का जाप करते रहते हो। तुम्हें पता है कि नहीं, लालटेन प्रकाश और रोशनी का पर्याय है। मोहब्बत और भाईचारे का प्रतीक है। ग़रीबों के जीवन से तिमिर हटाने का उपकरण है। हमने लालटेन के प्रकाश से ग़ैरबराबरी, नफ़रत, अत्याचार और अन्याय का अँधेरा दूर भगाया है और भगाते रहेंगे। तुम्हारा चिह्न तीर तो हिंसा फैलाने वाला हथियार है। मार-काट व हिंसा का पर्याय और प्रतीक है।

और हाँ जनता को लालटेन की ज़रूरत हर परिस्थिति में होती है। प्रकाश तो दिए का भी होता है। लालटेन का भी होता है और बल्ब का भी होता है। बल्ब की रोशनी से तुम बेरोज़गारी, उत्पीड़न, घृणा, अत्याचार, अन्याय और असमानता का अँधेरा नहीं हटा सकते इसके लिए मोहब्बत के साथ खुले दिल और दिमाग़ से दिया जलाना होता है। समानता, शांति, प्रेम और न्याय दिलाने के लिए ख़ुद को दिया और बाती बनना पड़ता है। समझौतों को दरकिनार कर जातिवादी, मनुवादी और नफ़रती आँधियों से उलझते व जूझते हुए ख़ुद को निरंतर जलाए रहना पड़ता है। तुम क्या जानो इन सब वैचारिक और सैद्धांतिक उसूलों को। डरकर शॉर्टकट ढूँढना और अवसर देख समझौते करना तुम्हारी बहुत पुरानी आदत रही है।

और हाँ तुम कहाँ मिसाइल के ज़माने में तीर-तीर किए जा रहे हो? तीर का ज़माना अब लद गया । तीर अब संग्रहालय में ही दिखेगा। लालटेन तो हर जगह जलता दिखेगा और पहले से अधिक जलता हुआ मिलेगा क्योंकि 11 करोड़ ग़रीब जनता की पीठ में तुमने विश्वासघाती तीर ही ऐसे घोंपे है । बाक़ी तुम अब कीचड़ वाले फूल में तीर घोंपो या छुपाओ। तुम्हारी मर्ज़ी.."

बिहार में 19 मई को आखिरी चरण के मतदान के साथ चुनाव के सभी सात चरण समाप्त हो जाएंगे। मतों की गिनती 23 मई को होगी।

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