भाजपा उम्मीदवार के बिगड़े बोल, कहा 'शहीद हेमंत करकरे की मौत मेरे श्राप का नतीजा'

Reported by lokpal report

19 Apr 2019

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भोपाल: मालेगांव विस्फोट की प्रमुख अभियुक्त भारतीय जनता पार्टी की नेता व भोपाल से पार्टी की प्रत्याशी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने मुंबई के पूर्व एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे के खिलाफ अपनी टिप्पणी से विवाद खड़ा कर दिया है। हेमंत करकरे ने 26/11 आतंकी हमले के दौरान अपनी जान दे दी थी। यूएपीए के तहत मालेगांव विस्फोट मामले में आतंकवाद के आरोपों का सामना कर रही भाजपा नेता ने कहा कि करकरे की मौत के उनके श्राप देने के 40 दिन बाद हुई।

प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि “मैंने हेमंत करकरे से पूछा कि क्या तुम्हारे पास मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं है? उन्होंने (करकरे) कहा कि वह सबूत लाएंगे, लेकिन मुझे नहीं छोड़ेंगे। मैंने उससे कहा- तुम बर्बाद हो जाओगे। और 40 दिनों के भीतर, उसे आतंकवादियों द्वारा मार दिया गया”।

नवंबर 2008 में मुंबई में 26/11 के हमलों के दौरान आतंकवादियों से लड़ते हुए करकरे ने दो अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ अपनी जान गंवा दी थी।

ठाकुर, जिन्हें "साध्वी" के रूप में भी जाना जाता है, मालेगाँव आतंकवादी हमले में मुकदमे का सामना कर रही हैं, जिसमें 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगाँव में हुए विस्फोट में छह लोग मारे गए थे और 12 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार आने के एक साल बाद 2015 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने ठाकुर को सबूतों के अभाव में क्लीन चिट दे दी लेकिन ट्रायल कोर्ट ने उन्हें यह कहते हुए बरी करने से इनकार कर दिया कि ब्लास्ट में उनकी मोटरसाइकिल का इस्तेमाल होना एक अहम् सबूत है।

2017 में, उन्हें बॉम्बे हाई कोर्ट ने जमानत दी थी। उसे महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) के तहत आरोपों से भी मुक्त कर दिया गया था। हालांकि, वह गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA)के तहत उनपर अब भी मुकदमा चल रहा है।

बुधवार को प्रज्ञा सिंह ठाकुर भाजपा में शामिल हुई और भगवा पार्टी ने उन्हें कांग्रेस के उम्मीदवार दिग्विजय सिंह के खिलाफ भोपाल अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया।

प्रज्ञा ठाकुर मालेगांव विस्फोट मामले में मुकदमे का सामना करने वाले सात आरोपियों में से एक हैं। 29 सितंबर, 2008 को महाराष्ट्र के मालेगाँव में एक मोटरसाइकिल में लगे बम से विस्फोट के बाद छह लोग मारे गए थे और एक दर्जन से अधिक घायल हो गए थे। उन्हें 2008 में गिरफ्तार किया गया था लेकिन सबूतों के अभाव में 2015 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा उन्हें क्लीन चिट दे दी गई थी। हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने उसे यह कहकर मना कर दिया कि यह स्वीकार किया जाना मुश्किल है कि ब्लास्ट उनकी मोटरसाइकिल के बिना हो पाना संभव था।

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