उत्तर प्रदेश में लिंचिंग पर हो सकती है उम्र कैद की सजा, लॉ पैनल ने दिया यह प्रस्ताव

Reported by lokpal report

11 Jul 2019

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लखनऊ: भीड़ हिंसा व गौ रक्षकों द्वारा गायों के नाम पर होने वाली लिंचिंग की घटनाओं का संज्ञान लेते हुए, उत्तर प्रदेश विधि आयोग ने एक मसौदा विधेयक पेश किया है जिसमें ऐसे अपराध के लिए आजीवन कारावास की सिफारिश की गई है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एएन मित्तल ने बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को विधेयक के मसौदे के साथ-साथ मॉब लिंचिंग पर एक रिपोर्ट सौंपी।

128-पृष्ठ की रिपोर्ट में राज्य में लिंचिंग के विभिन्न मामलों का हवाला दिया गया और 2018 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई सिफारिशों के अनुसार एक कानून बनाने की सिफारिश की गई। आयोग ने कहा कि लिंचिंग से निपटने के लिए मौजूदा कानून पर्याप्त नहीं हैं और इस बात पर जोर दिया गया है कि इससे निपटने के लिए एक अलग कानून होना चाहिए। इसमें अपराध के लिए सात साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का सुझाव दिया गया।

यह सुझाव देते हुए कि इस तरह के कानून को उत्तर प्रदेश कॉम्बिंग ऑफ मॉब लिंचिंग एक्ट कहा जा सकता है, आयोग ने पुलिस अधिकारियों और जिला मजिस्ट्रेटों की जिम्मेदारियों का भी उल्लेख किया है।

पैनल ने कहा कि कानून में पीड़ित व्यक्ति के परिवार को मुआवजे के लिए मुआवजा या जान-माल के नुकसान की भरपाई का प्रावधान होना चाहिए। इसमें कहा गया है कि पीड़ितों और उनके परिवारों के पुनर्वास के लिए भी प्रावधान होना चाहिए।

2012 से 2019 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में भीड़ हिंसा की 50 घटनाएं हुई हैं। लगभग 50 पीड़ितों में से 11 की मौत हो गई। इनमें से पच्चीस बड़े हमले के मामले थे, जिनमें गौ-रक्षक भी शामिल थे।

विधि आयोग की सचिव सपना त्रिपाठी ने गुरुवार को बताया, "इस स्थिति की पृष्ठभूमि में, आयोग ने अध्ययन करने के लिए मामलों की जाँच की और तदनुसार राज्य सरकार को एक व्यापक कानून बनाने की सिफारिश की।"

रिपोर्ट में कहा गया है कि केवल मणिपुर ने लिंचिंग के खिलाफ एक विशेष कानून बनाया है और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मध्य प्रदेश सरकार जल्द ही इसे लागू करने जा रही है।

पैनल ने राज्य में हिंसा और भीड़ हिंसा के विभिन्न मामलों का उल्लेख किया, जिसमें 2015 में गोमांस रखने के संदेह पर दादरी में मोहम्मद अखलाक की हत्या भी शामिल थी।

इसमें 3 दिसंबर, 2018 को बुलंदशहर में पुलिस व हिंदुत्ववादी संगठनों के बीच हुई झड़प में हुई इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की हत्या का जिक्र था।

चेयरमैन ने कहा कि भीड़ हिंसा अब पुलिस के साथ भी होना शुरू हो गया है। मित्तल ने रिपोर्ट में कहा, "भीड़ की हिंसा की घटनाएं फरुखाबाद, उन्नाव, कानपुर, हापुड़ और मुजफ्फरनगर जिलों में हुई हैं। पुलिस भी शिकार बन रही है क्योंकि लोग उन्हें अपना दुश्मन समझने लगे हैं।"

उन्होंने कहा, "गाजीपुर में एक हेड कांस्टेबल और एक जेल वार्डन की हत्या इसके उदाहरण हैं।"

पैनल ने मसौदा कानून तैयार करते समय विभिन्न देशों और राज्यों के कानूनों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का अध्ययन किया। इसने ऐसे मामलों में साजिश, सहायता या अपमान के लिए सजा का सुझाव दिया, साथ ही कानूनी प्रक्रिया में बाधा डालने के लिए भी।

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