अडानी के कोयला खदान के लिए ख़ामोशी से कट गए तालाबीरा गांव के 40,000 पेड़

Reported by lokpal report

10 Dec 2019

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सम्बलपुर : कोयला खदान के लिए रास्ता बनाने के लिए 9 दिसंबर को ओडिशा के संबलपुर जिले के तालाबीरा गांव में लगभग 40,000 पेड़ काट दिए गए। इस साल 28 मार्च को, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ओपनकास्ट कोयला खनन परियोजना के लिए 1,038.187 हेक्टेयर वन भूमि को हटाने के लिए स्टेज II को मंजूरी दी थी।

झारसुगुड़ा और समस्तीपुर जिलों में नेयवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन (NLC) इंडिया लिमिटेड द्वारा परियोजना का संचालन किया जा रहा है। मुख्य वन संरक्षक, संबलपुर की साइट निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार, इसमें 1,30,721 पेड़ों की कटाई की जाएगी।

NLC ने 2018 में अडानी ग्रुप के साथ माइन डेवलपमेंट और ऑपरेटर कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। जबकि सरकार ने जंगल काटने की अनुमति दे दी है, जबकि तालाबीरा गांव के वनवासियों द्वारा जंगल की रक्षा और संरक्षण का प्रयास किया गया है।

गाँव के निवासियों ने तालाबीरा ग्राम्य जंगल समिति नामक एक संगठन का गठन किया है और अपना एक संरक्षक नियुक्त किया था।

डाउन टू अर्थ में प्रकाशित खबर के अनुसार एक स्थानीय निवासी ने बताया कि “हम 50 से अधिक वर्षों से लगभग 970 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस जंगल की रक्षा कर रहे हैं। इस जंगल पर लगभग 3,000 लोग निर्भर हैं। अब, इन पेड़ों को सरकार द्वारा कोयले के लिए काटा जा रहा है"।

जबकि ग्रामीण निवासियों ने जंगल की रक्षा की है और इस पर निर्भर हैं, वन अधिकार अधिनियम, (एफआरए), 2006 के तहत इस मामले में कोई मामला भी दायर नहीं किया गया हैं। स्थानीय निवासी का कहना है कि “हमने सोचा था कि यह हमारा जंगल है और कोई इसे हमसे नहीं ले सकता। हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे जंगल को छीन लिया जाएगा। इसलिए, हमने एफआरए के तहत कोई मामला दायर नहीं किया।

उन्होंने कहा कि जब वे और उनके पड़ोसी जिला कलेक्टर के पास गए, तो उन्हें बताया गया कि जंगल सरकार का है और ग्रामीणों का इससे कोई लेना-देना नहीं है। राउत ने कहा, "कलेक्टर ने हमें बताया कि अगर कोई कोर्ट केस होता, तो बात अलग होती।" एफआरए के तहत जंगल के लोगों अधिकारों का ख्याल नहीं रखा गया और जन जागरूकता के अभाव में जंगल काट लिए गए।

ग्रामीणों का यह भी दावा है कि जिले के अधिकारियों ने खनन करने के लिए ग्राम सभा से एक नकली सहमति प्राप्त की। 30 जुलाई, 2009 के अनुसार, वन कटने से पहले MoEF और CC परिपत्र, ग्राम सभा की सहमति प्राप्त की जानी है। परिपत्र के अनुसार यह देखा जाता है कि “संबंधित ग्राम सभाओं से अनुमोदित पत्र यह दर्शाता है कि एफआरए के तहत सभी औपचारिकताओं / प्रक्रियाओं को पूरा किया गया है, और उन्होंने प्रस्तावित डायवर्जन और क्षतिपूरक और संशोधन के उपायों पर अपनी सहमति दी है"।

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