वित्त मंत्रालय का काले धन की रिपोर्ट का खुलासा करने से इंकार

Reported by lokpal report

04 Feb 2019

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नई दिल्ली: वित्त मंत्रालय ने देश और विदेश में भारतीयों द्वारा रखे गए काले धन की मात्रा पर तीन रिपोर्टों की प्रतियां साझा करने से इनकार कर दिया है. उनका कहना है कि संसदीय पैनल द्वारा जांच की जा रही है और विवरण का खुलासा करने से सदन के विशेषाधिकार का हनन होगा. ये रिपोर्ट चार साल से अधिक समय पहले सरकार को सौंपी गई थी.

यूपीए सरकार ने 2011 में इसके लिए आयोग बनाया था. आयोग की सिफारिशों को दिल्ली स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (एनआईपीएफपी) और नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट (एनआईएफएम) फरीदाबाद द्वारा अध्ययन किया था.

एक आरटीआई के जवाब में बताया गया कि एनआईपीएफपी, एनसीएईआर और एनआईएफएम की अध्ययन रिपोर्ट क्रमशः 30 दिसंबर, 2013, 18 जुलाई, 2014 और 21 अगस्त, 2014 को सरकार को सौंपी गई थी.

मंत्रालय ने कहा, "रिपोर्ट और सरकार के जवाब को वित्त पर स्थायी समिति के समक्ष रखने के लिए लोकसभा सचिवालय को भेज दिया गया है". लोकसभा सचिवालय ने सूचित किया है कि समिति इसकी जांच करेगी.

इसने इन रिपोर्टों की प्रतियों को साझा करने से इनकार यह कहते हुए किया कि इस खुलासे से संसद के विशेषाधिकार का हनन होगा और इसलिए, मांगी गई जानकारी को सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम की धारा 8 (1) (c) के तहत जाहिर करने से छूट दी गई है.

रिपोर्ट 21 जुलाई, 2017 को पैनल को सौंपी गई थी.

वर्तमान में, भारत और विदेशों में काले धन की मात्रा पर कोई आधिकारिक आकलन नहीं है.

यूएस-आधारित थिंक-टैंक ग्लोबल फाइनेंशियल इंटीग्रिटी (GFI) के एक अध्ययन के अनुसार, 2005-2014 के दौरान अनुमानित $ 770 बिलियन काले धन ने भारत में प्रवेश किया.

वैश्विक वित्तीय निगरानी विभाग की नवीनतम रिपोर्ट में कहा गया है कि इसी अवधि के दौरान लगभग 165 अरब डॉलर का अवैध धन देश से बाहर गया है.

2011 में अध्ययन का आदेश देते हुए वित्त मंत्रालय ने कहा था "काले धन के मुद्दे ने हाल के दिनों में जनता और मीडिया का ध्यान बेहद आकर्षित किया है. अब तक, देश के भीतर और बाहर काले धन का कोई विश्वसनीय अनुमान नहीं लगाया गया है''. वित्त मंत्रालय ने कहा था कि अब तक ये अनुमान विभिन्न अपरिवर्तनीय मान्यताओं और अनुमानों पर आधारित थे.

अध्ययन के लिए संदर्भ की शर्तें (ToR) में बेहिसाब आय और धन का आकलन या सर्वेक्षण शामिल था, और देश के भीतर और बाहर दोनों ओर मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों की प्रकृति की रूपरेखा बनायीं गयी थी.

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