मुलाकात समस्याओं से- नगर पालिका परिषद् : जहाँ सबकुछ है अस्थायी

Reported by lokpal report

02 Aug 2017

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अमेठी : अमेठी जिला अपने बनने से पूर्व ही राजनीतिक दलों के आकर्षण का केंद्र रहा है. गाँधी परिवार से सम्बद्ध होने के कारण दूसरे राजनीतिक दल स्वयं को भी इससे जोड़ने का प्रयास करते ही रहते हैं. आनन फानन में अपनी बसपा सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती द्वारा अमेठी को जिला घोषित करना और इसका श्रेय स्वयं को दे देना कदाचित अन्य दलों को कभी जंचा ही नहीं. इसीलिए जब वर्ष 2014 में आम चुनाव हुए तो बीजेपी प्रत्याशी स्मृति जुबिन ईरानी न केवल अमेठी संसदीय क्षेत्र बल्कि अमेठी जिले में पूरी तरह से सक्रिय हो गयीं. स्मृति की यह सक्रियता तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इस राजनीतिक अखाड़े में खींच लाई. इसी वजह से अगस्त 2014 में राज्य कैबिनेट ने अमेठी के प्रशासकीय मुख्यालय एवं ब्लॉक को नगर पालिका परिषद् की मंजूरी दे दी.

यह एक अपवाद ही था क्योंकि नगर पालिका परिषद के आवश्यक जनसँख्या का मापदंड यह नवोदित नगर पालिका पूरी नहीं करती है. अखिलेश यादव ने कहा था कि गौरीगंज को नगर पालिका परिषद का दर्जा देने का उद्देश्य इसका शीघ्रतापूर्वक विकास करना है. बहरहाल फरवरी 2015 में तत्कालीन नगर विकास मंत्री ने गौरीगंज को बतौर नगर पालिका परिषद पर अपनी मुहर लगा दी. 

अमेठी जिलाधिकारी निवास से सटे ब्लॉक परिसर में अस्थायी रूप से गौरीगंज नगर पालिका परिषद का अस्थायी कार्यालय स्थापित किया गया है. 10 ग्राम पंचायतों और 12 राजस्व ग्रामों से बने इस नवोदित नगर पालिका परिषद में आउटसोर्सिंग के माध्यम से 50 सफाई कर्मचारी हैं जिनपर स्वच्छ भारत मिशन का पूरा जिम्मा है. 

अब जबकि इस नए नगर पालिका परिषद में चुनाव नहीं हुए हैं इसलिए चुनाव होने तक जिलाधिकारी को पदेन रूप से प्रशासक का कार्यभार सौंपा गया है. उन्ही की देखरेख में नगर पालिका परिषद के विकास कार्य होते हैं. 

पब्लिक लोकपाल ने जब नगर पालिका परिषद के दफ्तर का दौरा किया तो वहां अधिशासी अधिकारी विजयकांत पांडेय मिले. उन्होंने बताया कि स्टाफ में उनके अलावा दो और लोगों की नियुक्ति हुई है जिन्हे आउटसोर्सिंग के द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर नियुक्त किया गया है. इसी तरफ सफाई कर्मचारियों का पद सृजित न होने के कारण उन्हें भी आउटसोर्सिंग के द्वारा नियुक्त किया गया है. 

कूड़ा निस्तारण केंद्र यानी डम्पिंग प्लांट के बारे में पूछने पर उन्होंने पब्लिक लोकपाल को बताया कि अब तक प्लाट का चयन नहीं किया जा सका है. हैरत की बात यह है कि यह तब है जबकि गौरीगंज को नगरपालिका परिषद का दर्जा मिले 2 वर्ष से ऊपर हो चुके हैं. कूड़ा निस्तारण का काम अभी काम चलाऊ हालत में है. हालाँकि अधिशाषी अधिकारी में ने बताया कि अभी यह काम प्रक्रियागत है जिसमे अभी काफी समय लग सकता है. इसके अलावा अधिशाषी अधिकारी ने जिलाधिकारी की भूमिका की सराहना की और बताया कि वह काफी सहयोग करते हैं. लेकिन यह कैसा सहयोग है कि प्रशासन अभी तक डम्पिंग प्लांट का चयन तक नहीं कर पाया है और न ही स्ट्रीट लाइट लगवा पाया है. शाम के बाद बिजली कटौती होने के  बाद सडकों पर घुप्प अँधेरा छा जाता है. यह अँधेरा अपराधियों के मनोबल को और भी बढ़ा देता है. 

अधिशाषी अधिकारी ने बताया कि स्ट्रीट लाइट के लिए उन्होंने ए.पी.जे.अब्दुल कलाम सौर परियोजना के तहत राज्य सरकार को पात्र भेजा गया है फ़िलहाल अभी तक वहां से कोई जवाब नहीं आया है. 

बहरहाल नवोदित नगरपालिका परिषद में राजनीतिक दिलचस्पी को छोड़कर बाकि सब अस्थायी है. अस्थायी कर्मचारी, अस्थायी कार्यालय, अस्थायी प्रशासक, अस्थायी कूड़ा निस्तारण केंद्र और अस्थायी जवाबदेही भी.⁠⁠⁠⁠

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