दिल्ली एनसीआर में पर्यावरण के नए खतरे, एक साल में हुआ दोगुना ओजोन प्रदूषण

Reported by lokpal report

20 Jun 2019

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नई दिल्ली: सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के एक नए विश्लेषण के अनुसार, पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में इस साल अप्रैल से जून के बीच ओजोन प्रदूषण अधिक था। दिल्ली स्थित गैर-लाभकारी इस थिंक टैंक ने खुलासा किया है कि दिल्ली में ओजोन का स्तर इस समय 1 अप्रैल से 15 जून के बीच निर्धारित मानकों से अधिक 13 प्रतिशत थी जबकि पिछले वर्ष इसी समय सीमा में यह स्तर 7 प्रतिशत पर था।

विश्लेषण से पता चलता है कि अब यह निर्धारित सीमा से बढ़कर 53 प्रतिशत से 92 प्रतिशत है जिसे 'बेहद उच्च' करार दिया गया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बस्तियों के बीच, फरीदाबाद में इसी समय अवधि में सबसे अधिक ओजोन का औसत निर्धारित मानक से 80 प्रतिशत से अधिक था। गाज़ियाबाद 67 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है जबकि गुड़गांव में यह स्तर 21 प्रतिशत पर है।

खुद राजधानी शहर में, कई औद्योगिक और आवासीय क्षेत्रों में यह 53 प्रतिशत से 93 प्रतिशत के बीच गिर गई। जिन क्षेत्रों में ओजोन प्रदूषण निर्धारित मानकों से अधिक था, 93 प्रतिशत पर नजफगढ़, 87 प्रतिशत पर श्री अरबिंदो पार्क, नरेला में 81 प्रतिशत, सिरी फोर्ट और रोहिणी में 80 प्रतिशत, नेहरू नगर और विवेक विहार 77 फीसदी, बवाना 75 फीसदी, जहांगीरपुरी 73 फीसदी, जेएलएन स्टेडियम 72 फीसदी द्वारका सेक्टर 8, 69 फीसदी और आरके पुरम 55 फीसदी रहा।

'एट द क्रॉसरोड्स' शीर्षक वाली रिपोर्ट में थिंक टैंक ने कहा है कि ओजोन एक प्रतिक्रियाशील गैस है और अस्थमा और सांस की बीमारी से जूझ रहे पीड़ित लोगों पर इसका तत्काल प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR) द्वारा 2018 के पहले जारी किए गए आंकड़ों से पता चला है कि सभी स्रोतों से सबसे ज़्यादा 62।5 फीसदी NOx नाइट्रस ऑक्साइड वाहन से उत्सर्जित होते हैं।

वहीँ सम्बन्धित अधिकारियों ने वाहनों और उद्योग से गैसीय उत्सर्जन में कटौती के लिए कठोर कार्रवाई को लागू करने की तत्काल आवश्यकता पर समय और फिर से जोर दिया है। दहन स्रोतों से गैसीय उत्सर्जन में कटौती की निवारक कार्रवाई दिल्ली में हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए भी चर्चा की जा रही है। वायुमंडल में नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO2) जैसी हानिकारक गैसों की उपस्थिति के कारण, लाखों लोगों के त्वचा कैंसर से पीड़ित होने का खतरा है।

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