आखिर कौन था सोहराबुद्दीन का कातिल? सवाल आज भी वहीं हैं

Reported by lokpal report

21 Dec 2018

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नई दिल्ली : सीबीआई की विशेष अदालत ने शुक्रवार को सोहराबुद्दीन शेख और तुलसीराम प्रजापति के कथित फर्जी मुठभेड़ के सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया. इन आरोपियपन में ज्यादातर पुलिसकर्मी हैं.

सीबीआई की विशेष अदालत ने गवाहों के पुनर्परीक्षण की याचिका को ख़ारिज करते हुए अभियोजन पक्ष को क्लीन चिट दे दी.

सीबीआई स्पेशल जज ने अपने फैसले में माना है कि सभी गवाह और सबूत संतोषजनक नहीं हैं कि साबित कर सकें कि हत्या में किसी तरह की साजिश थी. कोर्ट ने यह भी माना है कि परिस्थिति जन्य साक्ष्य पर्याप्त नहीं हैं.

सोहराबुद्दीन मामले में सारे 22 आरोपियों को बरी कर दिया है. किसी के खिलाफ कोई चार्ज सिद्ध नहीं हुआ. सोहराबुद्दीन हत्या मामले में कोर्ट ने माना कि हत्या गोली लगने हुई है लेकिन गोली 22 में से किसी आरोपी ने चलाई थी यह साबित नहीं हुआ.

ज्यादातर आरोपी, जिन्हें आज बरी कर दिया गया है, गुजरात और राजस्थान के कनिष्ठ स्तर के पुलिस अधिकारी हैं. साक्ष्य के अभाव में अदालत सीबीआई द्वारा इस मामले में 38 में से 16 आरोपियों को बरी कर चुका है.

क्या है पूरा मामला-
सीबीआई के मुताबिक आतंकवादियों से संबंध रखने वाला कथित गैंगेस्टर शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और उसके सहयोगी प्रजापति को गुजरात पुलिस ने एक बस से उस वक्त अगवा कर लिया था, जब वे लोग 22 और 23 नवंबर 2005 की दरम्यिानी रात हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जा रहे थे. सीबीआई के मुताबिक शेख की 26 नवंबर 2005 को अहमदाबाद के पास कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई.

उसकी पत्नी को तीन दिन बाद मार डाला गया और उसके शव को ठिकाने लगा दिया गया. साल भर बाद 27 दिसंबर 2006 को प्रजापति की गुजरात और राजस्थान पुलिस ने गुजरात - राजस्थान सीमा के पास चापरी में कथित फर्जी मुठभेड़ में गोली मार कर हत्या कर दी. अभियोजन ने इस मामले में 210 गवाहों से पूछताछ की जिनमें से 92 मुकर गए. इस बीच, बुधवार को अभियोजन के दो गवाहों ने अदालत से दरख्वास्त की कि उनसे फिर से पूछताछ की जाए. इनमें से एक का नाम आजम खान है और वह शेख का सहयोगी था.

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