ईवीएम खरीदी के लिए सरकार को देने हैं 1600 करोड़ रुपये

Reported by lokpal report

10 Feb 2019

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नयी दिल्ली:  सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 1,637 करोड़ रुपये की मांग की है ताकि कानून मंत्रालय लोकसभा चुनाव से पहले ईवीएम और पेपर ट्रेल मशीनों के दो आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान करने कर सके.

सरकार ने 2018-19 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों के तीसरे बैच में 1,637.14 करोड़ रुपये के भुगतान के लिए संसद की मंजूरी मांगी है जिससे कानून मंत्रालय इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन और वीवीपैट मशीन के लिए भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड का भुगतान कर सके. 

बजट सत्र समाप्त होने पर अनुदानों की अनुपूरक मांगों का तीसरा बैच 13 फरवरी तक पारित किया जाएगा.

दो सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को M3 टाइप के ईवीएम के निर्माण करने का काम सौंपा गया है. दोनों उपक्रमों को इस लोकसभा चुनाव के लिए लगभग 22.3 लाख बैलेट यूनिट और 16.3 लाख कंट्रोल यूनिटों को चुनाव आयोग के पास पहुँचाना है. 

लगभग 22.3 लाख बैलेट यूनिट, 16.3 लाख कंट्रोल यूनिट और लगभग 17.3 लाख वीवीपीएटी या पेपर ट्रेल मशीनों का इस्तेमाल 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए किया जाएगा. मशीनों की संख्या में प्रशिक्षण के साथ-साथ प्रतिस्थापन के लिए बफर स्टॉक शामिल हैं.

इन मशीनों को अगले संसदीय चुनावों में पूरे भारत के लगभग 10.6 लाख मतदान केंद्रों पर तैनात किया जाएगा.

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड को 30 सितंबर, 2018 तक इन मशीनों को पोल पैनल तक पहुंचाने के लिए अनिवार्य किया गया था.

अब तक, 113 विधानसभा चुनावों और 2000 के बाद से तीन लोकसभा चुनावों में ईवीएम का उपयोग किया गया है.

कुछ विपक्षी दलों द्वारा बैलट पेपर पर वापस जाने की मांग के बीच, आयोग ने यह सुनिश्चित किया कि ईवीएम के उपयोग ने बूथ कैप्चरिंग और मतपत्रों की गिनती में देरी और त्रुटियों के दिनों को समाप्त कर दिया है.

कई सियासी पार्टियों ने वोटिंग मशीनों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं, आरोप लगाया है कि उनके साथ छेड़छाड़ की जा सकती है.

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