दिग्विजय सिंह से मुकाबले के लिए भाजपा ने इस 'कट्टर हिंन्दुत्ववादी नेता को' दिया टिकट

Reported by lokpal report

17 Apr 2019

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भोपाल: 2008 के मालेगांव धमाकों की आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर मध्य प्रदेश के भोपाल से बीजेपी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगी। यहाँ प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व दिग्विजय सिंह कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। साध्वी प्रज्ञा मालेगांव धमाका मामले में जमानत पर बाहर हैं, जिसमें उन्हें महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) से मुक्ति मिल गई है हालाँकि वह अन्य आरोपों का सामना कर रही हैं।

भोपाल में भाजपा कार्यालय में केसरिया वस्त्र पहने साध्वी प्रज्ञा ने कहा, "मैं औपचारिक रूप से भाजपा में शामिल हुई हूं, मैं चुनाव लड़ूंगी और निश्चित रूप से जीत हासिल करूंगी। यह मेरे लिए मुश्किल नहीं होगा।" बताया जा रहा है कि साध्वी ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं शिवराज सिंह चौहान और रामलाल से मुलाकात की।

भोपाल के वर्तमान भाजपा सांसद आलोक संजर ने कहा कि पार्टी ने उनका पूरा समर्थन किया है और वह निश्चित रूप से इस सीट पर जीत हासिल करेंगी। संजर ने एक एक न्यूज़ चैनल से कहा, "उनके (सधिवि प्रज्ञा सिंह ठाकुर) खिलाफ कोई आरोप साबित नहीं हुआ। एक महिला को परेशान किया गया। अब इसका बदला लेने का समय आ गया है।"

साध्वी प्रज्ञा व लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित को मालेगांव विस्फोटों में आरोप लगने के बाद कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने इसे "भगवा आतंक" कहा था। 29 सितंबर, 2008 को, मुंबई से लगभग 270 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र के मालेगांव में मोटरसाइकिल पर लगे दो बम विस्फोट हुए, जिसमें सात लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हुए थे। ये दोनों मामले में जमानत पर बाहर हैं।

साध्वी प्रज्ञा ने कहा, "हम सभी मिलकर उन सभी लोगों से मुकाबला करेंगे जो देश के खिलाफ साजिश रच रहे हैं और उन्हें हरा देंगे।"

भड़काऊ टिप्पणियों और भाषणों के लिए जानी जाने वाली विवादास्पद व्यक्ति साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, भाजपा से जुड़े युवा संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और 'दुर्गा वाहिनी' व विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की महिला शाखा से जुड़ी थीं।

हालांकि अदालत ने उसके खिलाफ महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) के प्रावधानों को हटा दिया, लेकिन उसके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मुकदमा चलाया जा रहा है।

"हिंदू आतंक" शब्द से जुड़े एक तीसरे व्यक्ति, स्वामी असीमानंद को 2007 में हुए समझौता एक्सप्रेस विस्फोट मामले में में बम-निरोधी अदालत ने बरी कर दिया था। इसमें लगभग 70 लोग मारे गए थे। उसके बाद, भाजपा के शीर्ष नेताओं ने कांग्रेस द्वारा इस शब्द का इस्तेमाल  किये जाने पर उपयोग पर हमला किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र में एक रैली में कहा कि कांग्रेस ने "शांतिप्रिय हिंदुओं" को आतंकवादी करार दिया जिसका नतीजा उन्हें देश के मतदाताओं देंगे।

गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह कांग्रेस के उन नेताओं में से थे, जो "भगवा आतंक" की निंदा करने में सबसे मुखर हैं।

भाजपा 1989 के बाद से भोपाल में कभी नहीं हारी है, जबकि यहाँ मुस्लिम आबादी काफी अधिक हैं। दिग्विजय सिंह को उनकी पार्टी के सहयोगी मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भोपाल या इंदौर जैसी कठिन सीटों से चुनाव लड़ने के लिए कहा, जहां कांग्रेस ने वर्षों में जीत हासिल नहीं की है। दिग्विजय सिंह ने यह चुनौती स्वीकार की और उन्हें भोपाल लोकसभा के लिए पार्टी प्रत्याशी नामित किया गया।

विश्लेषकों का मानना है कि साध्वी प्रज्ञा को एक मजबूत कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ मैदान में उतारकर, भाजपा ध्रुवीकरण की उम्मीद कर रही है। 

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