नवंबर में 17 महीनों में सबसे कम रहा औद्योगिक उत्पादन

Reported by lokpal report

11 Jan 2019

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नई दिल्ली : शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) की वृद्धि दर एक महीने पहले के 8.4 फीसदी के मुकाबले 0.5 फीसदी और एक साल पहले के 8.5 फीसदी के स्तर पर आ गई है. नवंबर में विनिर्माण क्षेत्र विशेष रूप से उपभोक्ता और पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन घटने से आईआईपी 17 महीनों में सबसे कम हो गया है. पिछले वर्ष अप्रैल-नवंबर 2018 की इसी अवधि में संचयी विकास 5.0 प्रतिशत था.

एक साल पहले नवंबर, 2017 में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर 8.5 प्रतिशत रही थी. इससे पहले जून, 2017 में औद्योगिक उत्पादन 0.3 प्रतिशत घटा था. अक्टूबर, 2018 की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर संशोधित होकर 8.1 से 8.4 प्रतिशत हो गई.

मासिक आधार पर अक्टूबर में इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर की ग्रोथ 8.2 फीसद से बढ़कर 8.10 फीसदी पर पर पहुंच गई थी. माइनिंग सेक्टर की ग्रोथ 0.2 फीसद से बढ़कर 7 फीसदी पर पहुंच गई थी. प्राइमरी गुड्स की ग्रोथ भी 2.6 फीसद से बढ़कर 6 फीसद के स्तर पर पहुंच गई थी.

उद्योगों के संदर्भ में, विनिर्माण क्षेत्र में 23 में से 10 उद्योग समूहों ने नवंबर 2018 के दौरान सकारात्मक वृद्धि दिखाई. उपयोग आधारित वर्गीकरण के अनुसार, नवंबर 2017 में नवंबर 2018 में विकास दर प्राथमिक वस्तुओं में 3.2 प्रतिशत है. मध्यवर्ती सामानों में (-) 4.5 प्रतिशत और आधारभूत संरचना / निर्माण वस्तुओं में 5 प्रतिशत है.

क्या होता है आईआईपी-औद्योगिक उत्पादन सूचकांक?
आईआईपी का किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में खास महत्व होता है. इससे पता चलता है कि उस देश की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक वृद्धि किस गति से हो रही है.आईआईपी के अनुमान के लिए 15 एजेंसियों से आंकड़े जुटाए जाते हैं. इनमें डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस, सेंट्रल स्टेटिस्टिकल आर्गेनाइजेशन और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी शामिल हैं.

सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा मानकों के मुताबिक किसी उत्पाद के इसमें शामिल किए जाने के लिए प्रमुख शर्त यह है कि वस्तु के उत्पादन के स्तर पर उसके उत्पादन का कुल मूल्य कम से कम 80 करोड़ रुपए होना चाहिए. इसके अलावा यह भी शर्त है कि वस्तु के उत्पादन के मासिक आंकड़े लगातार उपलब्ध होने चाहिए.

इंडेक्स में शामिल वस्तुओं को तीन समूहों-माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिसिटी में बांटा जाता है. फिर इन्हें बेसिक गुड्स, कैपिटल गुड्स, इंटरमीडिएट गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स जैसी उप-श्रेणियों में बांटा जाता है.

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