महाराष्ट्र में डांस बारों के लिए बदल गए नियम, सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नियमों में दी ढील 

Reported by lokpal report

17 Jan 2019

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नई दिल्ली: डांस बार के लिए महाराष्ट्र के सख्त नियमों में सुप्रीम कोर्ट ने ढील दी है, जिसमें आज कहा गया है कि "शराब और डांस का साथ हो सकता है". यह देखते हुए कि 2005 के बाद से किसी भी डांस बार को लाइसेंस नहीं दिया गया है, शीर्ष अदालत ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार "केवल नियंत्रित करने कोशिश में डांस बार पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है". पिछले साल अगस्त में, अदालत ने 2016 के महाराष्ट्र कानून को चुनौती देने वाले होटल और रेस्तरां मालिकों की दलीलों पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था.

आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार -

  • अदालत ने कहा कि एक नियम यह है कि धार्मिक स्थलों और शैक्षणिक संस्थान से डांस बार 1 किमी दूर होना चाहिए, यह मुंबई में के लिए तार्किक नहीं है.
  • डांस बार के कलाकारों को टिप्स दिए जा सकते हैं, न कि उनपर नोट बरसाए जाएं.
  • सुप्रीम कोर्ट ने समय तय करते हुए राज्य में डांस बार को शाम 6 बजे से 11.30 बजे तक खुला रखने का समर्थन किया.
  • बार रूम और डांस फ्लोर अलग होने की आवश्यकता वाले नियम को भी अदालत ने रद्द कर दिया.
  • अदालत द्वारा सीसीटीवी कैमरों की अनिवार्यता को भी समाप्त किया गया जिसमें कहा गया कि यह नियम 'निजता का उल्लंघन' करता है.
  • सुप्रीम कोर्ट ने एक प्रावधान को खारिज कर दिया कि डांस बार के मालिक के पास "अच्छा चरित्र" होना चाहिए और कोई "आपराधिक रिकॉर्ड" नहीं होना चाहिए. अदालत ने कहा, "अच्छे चरित्र और आपराधिक होने की कोई सटीक पैमाना नहीं होता है, इसकी कोई सटीक परिभाषा नहीं है".
  • न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने कहा, "2005 से आज तक, एक भी व्यक्ति को डांस बार का लाइसेंस नहीं दिया गया है. ऐसा नहीं किया जा सकता है. नियम हो सकते हैं लेकिन यह पूरी तरह से शराब बंदी की शर्त पर नहीं हो सकते हैं. अदालत ने पिछले साल कहा था कि ऐसा लगता है कि राज्य में नैतिक पुलिसिंग चल रही है.
  • डांस बार मालिकों ने धार्मिक या शैक्षणिक संरचना से 1 किलोमीटर की दूरी बनाए रखने के प्रतिबंध पर आपत्ति जताई थी और दावा किया था कि यह बड़े शहरों में संभव नहीं है. उन्होंने अदालत को बताया था कि राज्य सरकार ने एक रवैया अपनाया है कि वह अदालत के आदेशों के बावजूद डांस बार की अनुमति नहीं देगी.
  • महाराष्ट्र सरकार के वकील निशांत कटनेस्वरकर ने कहा, "हम सरकार से खुश हैं. हमारा मुख्य उद्देश्य बार लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था और जिसे अदालत ने बरकरार रखा है.
  • डांस बार रेगुलेशन बिल 2016 राज्य विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था जिसमे प्रदर्शन क्षेत्रों में शराब परोसने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और कहा गया था कि परिसर को 11:30 बजे तक बंद कर देना चाहिए. इन नियमों का पालन न करने वालों के लिए डांस बार मालिकों और ग्राहकों पर भारी जुर्माना भी लगाया.

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