सावधान ! डूबने वाली है धरती, चारों तरफ होगा पानी ही पानी !

Reported by lokpal report

16 Jan 2019

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नई दिल्ली : एक नए अध्ययन से पता चला है कि अंटार्कटिका 1980 के दशक की तुलना में छह गुना अधिक तेजी से पिघल रहा है. वैज्ञानिकों ने यह पता लगाने के लिए आकाशीय तस्वीरों, उपग्रह मापन और कंप्यूटर मॉडल का इस्तेमाल किया कि 1979 में 176 व्यक्तिगत घाटियों में दक्षिणी महाद्वीप कितनी तेजी से पिघल रहे हैं.  मानव-जलवायु परिवर्तन का एक प्रमुख संकेतक के रूप में अध्ययन में पता चला है कि महाद्वीप पर बर्फ पहले की तुलना में तेजी से पिघल रही है.

नए अध्ययन में पता चला है कि 2009 के बाद से, अंटार्कटिका में प्रति वर्ष लगभग 278 बिलियन टन (252 बिलियन मीट्रिक टन) बर्फ पानी में तब्दील हुई है. 1980 के दशक में यह दर एक साल में 44 बिलियन टन (40 बिलियन मीट्रिक टन) थी.

हाल ही में पिघलने की दर पिछले साल एक अध्ययन से मिली तुलना में 15% अधिक है.

एरिक रिग्नोट, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, इरविन, हिम वैज्ञानिक, अ प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज ’में नए अध्ययन के प्रमुख लेखक हैं. उन्होंने कहा कि बड़ा अंतर यह है कि उनके उपग्रह आधारित अध्ययन में पाया गया कि पूर्वी अंटार्कटिका, जिसे स्थिर माना जाता था, एक वर्ष में 56 बिलियन टन (51 बिलियन मीट्रिक टन) बर्फ पिघल रही है. 

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