आयकर के नए वर्ग और उनपर लागू दरें, भारत निवासियों से लिया जाने वाला अधिभार, जानें सब कुछ :

Reported by lokpal report

30 Jan 2019

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नई दिल्ली: 2018 के बजट में, केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आयकर स्लैब और लागू दरों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं किए, सिवाय आयकर पर कुल उपकर 4 प्रतिशत बढ़ाने के. आकलन वर्ष  2019-2020 और वित्त वर्ष 2018-2019 में आयकर वर्ग और छूट सीमा, आयु व निवासिता स्थिति के आधार पर उप वर्गीकृत किया गया है. निवासी भारतीय के लिए निवेश के कई विकल्प उपलब्ध हैं जो कर योग्य आय को नीचे लाने में मदद करते हैं.

इस तरह के निवेश की मदद से, एक व्यक्ति आयकर अधिनियम की धारा 80 सी से 80 यू के तहत कुल आय पर आयकर में छूट पा सकता है. सार्वजनिक बचत कोष (पीपीएफ), राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी), सुकन्या समृद्धि खाता, राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस), वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस), इक्विटी-लिंक बचत योजना (ईएलएसएस) और कई अन्य आधारों पर धारा 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक की आयकर में छूट मिलती है.

वर्तमान आयकर स्लैब के अनुसार, प्रति वर्ष 2.5 लाख रुपये से अधिक की आय वाले सभी निवासी व्यक्तियों पर लागू विभिन्न टैक्स स्लैब के तहत कर लगाया गया है. 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए 2.5 लाख रुपये तक की कर छूट है. वहीं 2,50,001 से 5,00,000 तक आय पर 5 प्रतिशत कर, रु. 5,00,001 से 10,00,000 तक की आय पर 20 प्रतिशत व 10 लाख रुपये से upar की आय पर 30 प्रतिशत कर देना पड़ेगा.श्यक है।

वरिष्ठ नागरिकों (60 और 80 के बीच की आयु सीमा के भीतर) और अति वरिष्ठ नागरिकों (80 वर्ष और उससे अधिक आयु) के लिए, सरकार ने कर छूट सीमा के संबंध में कुछ छूट दी है. वरिष्ठ नागरिकों के लिए, 3 लाख रुपये तक की आय को कर से मुक्त किया जाता है. रु. 3,00,001 रुपये और 5,00,000 रुपये के बीच की आय पर 5 प्रतिशत कर लगाया जाता है. रु. 5,00,001 रुपये 10 लाख की आय पर 20 प्रतिशत कर लगता है. 10 लाख रुपये से अधिक की वार्षिक आय पर 30 प्रतिशत कर लागू है.

अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए, कर छूट सीमा को छोड़कर सभी टैक्स स्लैब और लागू दरें समान हैं. 5,00,000 रुपये तक की वार्षिक आय वाले अति वरिष्ठ नागरिकों को आयकर का भुगतान करने से छूट दी गई है.

नियमित आयकर स्लैब के अलावा लागू आयकर पर 2 प्रतिशत की दर से एक शिक्षा उपकर और 1 प्रतिशत का द्वितीयक उपकर अलग से  लगाया गया है. इसके अतिरिक्त यदि शुद्ध आय 50 लाख से 1 करोड़ रुपये है तो उस पर 10 प्रतिशत अधिभार वसूला जाता है वहीं अगर शुद्ध आय 1 करोड़ रुपये से अधिक है तो यही अधिभार 15 प्रतिशत हो जाता है.

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