इनफ़ोसिस के सह संस्थापक नंदन नीलेकणि को आरबीआई में मिली यह जिम्मेदारी

Reported by lokpal report

08 Jan 2019

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नई दिल्ली : भारतीय रिज़र्व बैंक ने मंगलवार को इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को भारत में भुगतान के डिजिटलीकरण की निगरानी वाली समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया. इस समिति में नीलेकणि के साथ चार अन्य सदस्य भी होंगे. नंदन नीलेकणि को आधार के वास्तुकार के रूप में जाना जाता है और वह भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं.

समिति के अन्य सदस्यों में आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर एचआर खान, विजया बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक किशोर संसी, पूर्व सूचना प्रौद्योगिकी सचिव अरुणा शर्मा और सेंटर फॉर इनोवेशन, इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (CIIE) में मुख्य नवाचार अधिकारी संजय जैन शामिल हैं.

समिति को 90 दिन में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी. यह समिति देश में भुगतान के डिजिटलीकरण की मौजूदा स्थिति की समीक्षा करेगी, इसमें आये मौजूदा अंतराल की पहचान करेगी और उन्हें पाटने के तरीके सुझाएगी. इसके अलावा, यह वित्तीय समावेशन में डिजिटल भुगतान के वर्तमान स्तरों का भी आकलन करेगा और अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण में तेजी लाने के लिए एक रोडमैप भी बनाएगी.

एक अन्य क्षेत्र जहां समिति को ध्यान देना होगा कि उसे डिजिटल भुगतान की सुरक्षा को और मजबूत करना है जिससे डिजिटल वित्तीय सेवाओं के सरलीकरण से ग्राहकों का विश्वास बढे. नीलेकणी के नेतृत्व वाले पैनल को डिजिटल भुगतान में तेजी लाने के लिए एक मध्यम अवधि की रणनीति का सुझाव देना होगा.

यह निर्णय एक अंतर-मंत्रालयी समिति की बैठक के बाद आया है जिसकी अध्यक्षता पूर्व वित्त सचिव रतन वटल ने की थी. जिसने पिछले साल डिजिटल भुगतान क्षेत्र को विनियमित करने के लिए एक स्वतंत्र भुगतान नियामक बोर्ड (PRB) की स्थापना की सिफारिश की थी.

समिति ने सिफारिश की थी कि केंद्र सरकार द्वारा नामित गैर-आरबीआई सदस्यों के बहुमत के साथ RBI के समग्र ढांचे के भीतर PRB की स्थापना की जाए.

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