पूर्व नौकरशाहों ने लिखा खुला खत, बुलंदशहर में पुलिस अधिकारी की मौत पर क्यों मौन है योगी सरकार ?

Reported by lokpal report

27 Dec 2018

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार की तीखी आलोचना में, 83 पूर्व सिविल सेवकों, जिनमें पूर्व-विदेश सचिव श्याम सरन और शिवशंकर मेनन शामिल हैं, ने एक खुला पत्र लिखा है.  जिसमें उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों की आलोचना करते हुए लिखा है कि राज्य के बुलंदशहर में दंगों के दौरान हुई एक पुलिस अधिकारी के हत्यारों के खिलाफ कार्रवाई में दोनों ही सरकारें नाकाम रही हैं.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे की मांग करते हुए पत्र में 3 दिसंबर को कथित गोरक्षा को लेकर भीड़ हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह और एक अन्य व्यक्ति सुमित कुमार की हत्या कर दी गई थी. पूर्व नौकरशाहों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय से हिंसा का संज्ञान लेने और न्यायिक जांच का आदेश देने का आग्रह किया है. साथ ही उन्होंने राज्य की नौकरशाहों जिसमे मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक व गृह सचिव का जिक्र करते हुए लिखा है कि वे अपने संवैधानिक कर्तव्य को निर्भयतापूर्वक लागू करने के बजाय अपने राजनीतिक आकाओं के विकृत हुक्म का पालन करने के लिए डर शासन लागू कर रहे हैं.  समाचार एजेंसी के हवाले से बताया गया है कि पत्र में नागरिकों को एकजुट होने के लिए भी कहा गया है. उन्होंने "नफरत और विभाजन की राजनीति के खिलाफ इसे धर्मयुद्ध" कहा है.

पत्र में कहा गया है कि किसी भी सभ्य समाज में, किसी भी अन्य अपराध की तुलना में पुलिसकर्मी की हत्या अधिक गंभीर अपराध है क्योंकि यह उस सभ्यता की नींव हमले का प्रतीक है''.

दिल्ली के पूर्व एलजी नजीब जंग, पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह, आईएएस से कार्यकर्ता बनी अरुणा रॉय और हर्ष मंडेर, प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सिरकर और पूर्व योजना सचिव एनसी सक्सेना सहित कई नौकरशाहों ने इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं. जिसमें कहा गया है कि बुलंदशहर में जो हिंसा हुई थी उसके जरिये इस क्षेत्र में रहने वाले मुसलमानों को एक संदेश भेजने का एक जानबूझकर प्रयास किया गया कि उन्हें 'उनकी अधीनता को स्वीकार करना होगा, भय में जीना होगा और बहुसंख्यक समुदाय के फरमानों को मानना होगा'.

पत्र में कहा गया है, आदित्यनाथ ने "घटना की गंभीरता और उसके सांप्रदायिक इरादे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. वह हिंसा के अपराधियों की निंदा करते   पुलिस को उनके खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देते, लेकिन इसके बजाय वह उनसे अवैध गोहत्या के लिए जिम्मेदार लोगों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कह रहे हैं''.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए, पत्र में कहा गया है, "हमारे प्रधान मंत्री, जो अपने चुनाव अभियानों में व्यस्त हैं और जो हमें कभी नहीं बताते हैं कि भारत का संविधान एकमात्र पवित्र ग्रंथ कैसे है, जिसकी वह पूजा करते हैं, यहां तक ​​कि वे चुप्पी भी बनाए रखते हैं. एक मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) संविधान की सरासर अवमानना करते हुए दिखाई देता है''.

इस बीच, योगी आदित्यनाथ ने बुलंदशहर हिंसा को 'राजनीतिक साजिश' करार दिया है. उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग उनके राजनीतिक आधार को ख़त्म करना चाहते हैं. आदित्यनाथ ने कहा, "जो लोग अराजकता पैदा करना चाहते थे ... गोहत्या के बाद दंगे भड़काने वालों के इरादों को नाकाम कर दिया गया, यह घटना एक राजनीतिक साजिश थी, जो अब उजागर हुई है".

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