नोटबंदी के बाद गई 50 लाख लोगों की नौकरियां: अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के एक रिपोर्ट 

Reported by lokpal report

17 Apr 2019

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नई दिल्ली: बेंगलुरु स्थित अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी ने मंगलवार को स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया (SWI) 2019 की रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 और 2018 के बीच 50 लाख पुरुषों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है, "माना जा रहा है कि नवंबर 2016 में हुई विमुद्रीकरण (नोटबंदी) के साथ नौकरियों में गिरावट की शुरुआत हुई है हालांकि केवल प्रवृत्तियों के आधार पर दोनों में कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता है।"

रिपोर्ट में कहा गया है कि बेरोजगारी 2011 के बाद तेजी से बढ़ी है। 2018 में कुल बेरोजगारी दर लगभग 6 प्रतिशत है, जो कि 2000 से 2011 के दशक में दोगुनी स्थिति पर है। देश भर के बेरोजगारों में ज्यादातर उच्च शिक्षित और युवा हैं। शहरी महिलाओं में, स्नातक कामकाजी उम्र की आबादी का 10 प्रतिशत है, जिसमे 34 प्रतिशत बेरोजगार हैं। 20-24 वर्ष आयु वर्ग बेरोजगारों की संख्या ज्यादा है। शहरी पुरुषों में, इस आयु वर्ग में कामकाजी उम्र की आबादी का 13.5 प्रतिशत है, जिसमे 60 प्रतिशत बेरोजगार हैं।

ग्रामीण पुरुषों में, स्नातक कामकाजी उम्र की आबादी का लगभग 7 प्रतिशत है, जिसमे 20 प्रतिशत से अधिक बेरोजगार हैं, जबकि ग्रामीण महिलाओं के बीच, स्नातक कामकाजी उम्र की आबादी का केवल 3.2 प्रतिशत है, जिसमे 24 प्रतिशत बेरोजगार हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, "भारत में खुले बेरोजगारी दर आज 35 वर्ष से कम उम्र के लोगों और उन लोगों के लिए एक चिंता का विषय है जो 10 वीं कक्षा से अधिक विशेष रूप से 12 वीं कक्षा से अधिक शिक्षित हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि उच्च शिक्षितों में बढ़ती खुली बेरोजगारी के अलावा, कम शिक्षित (और संभावित, अनौपचारिक) कर्मचारियों में भी 2016 के बाद से नौकरी के नुकसान और काम के अवसरों में कमी देखी है।

रिपोर्ट के अनुसार, बेरोजगारी के स्तर के साथ-साथ श्रम शक्ति की भागीदारी के संबंध में महिलाओं की स्थिति पुरुषों की तुलना में बदतर है। अनौपचारिक क्षेत्र को विमुद्रीकरण के साथ-साथ माल और सेवा कर (जीएसटी) की शुरूआत से सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा।

रिपोर्ट ने निष्कर्ष निकाला है कि पिछले तीन साल भारतीय श्रम बाजार के साथ-साथ श्रम आँकड़ों की प्रणाली में भी भारी उथल-पुथल देखी गई है।

जुलाई 2017 से जून 2018 के बीच नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस द्वारा की गई आवधिक श्रमबल सर्वेक्षण में बेरोजगारी की दर 6.1 प्रतिशत बताई गई, जो 1972-73 के बाद सबसे अधिक है। हालाँकि सरकार द्वारा इस रिपोर्ट को बाहर आने से रोक दिया गया था लेकिन बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार द्वारा इसे किसी तरह हासिल कर लिया था।

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