गोधरा दंगे की जाँच के याचिकाकर्ता रहे पूर्व IPS को एक अन्य मामले में हुई उम्रकैद की सजा 

Reported by lokpal report

20 Jun 2019

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जामनगर: जामनगर सत्र न्यायालय ने 1990 में हिरासत में मौत के मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई है। 2002 के दंगे में कथित रूप से एक महत्वपूर्ण भूमिका के लिए गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ 2011 में सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल करने के बाद संजीव भट्ट सुर्खियों में आए थे।

पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने 30 साल पुराने हिरासत में मौत के मामले में 11 अतिरिक्त गवाहों की जांच करने की मांग करते हुए संजीव भट्ट की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और अजय रस्तोगी की एक अवकाश पीठ ने कहा कि तीन न्यायाधीशों वाली पीठ ने पहले ही ऐसी एक याचिका पर एक आदेश पारित किया था और इसलिए यह याचिका पर विचार नहीं कर सकती।

संजीव भट्ट को जिस मामले में दोषी पाया गया है उसके अनुसार अभियोजन पक्ष के अनुसार संजीव भट्ट ने वहां एक सांप्रदायिक दंगे के दौरान 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया था और जिस दौरान अस्पताल में बंदियों में से एक की मौत हो गई थी। वह उस समय गुजरात के जामनगर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात थे।

उन्हें 2011 में बिना अनुमति के ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और आधिकारिक वाहनों के दुरुपयोग के आरोप में निलंबित कर दिया गया था और बाद में अगस्त 2015 में बर्खास्त कर दिया गया था।

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